मेरी यात्रा - भारत की ज्ञान की यात्रा
सप्तपुरी
1. अयोध्या (Ayodhya):
अयोध्या सरयू नदी के तट पर बसी मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की जन्मस्थली है। इसे सप्तपुरियों में प्रथम स्थान प्राप्त
है
और यह प्राचीन इक्ष्वाकु वंश की राजधानी रही है। राम जन्मभूमि मंदिर के साथ-साथ यहाँ के पौराणिक घाट और मंदिर भक्तों को
शांति और अटूट भक्ति का अनुभव कराते हैं। यह नगरी सनातन धर्म में त्याग, धर्म और आदर्श जीवन का प्रतीक मानी जाती है।
2. मथुरा (Mathura):
यमुना नदी के किनारे स्थित मथुरा भगवान श्री कृष्ण की जन्मस्थली के रूप में विश्वभर में पूजनीय है। यह प्राचीन नगरी
ब्रज
संस्कृति का हृदय है, जहाँ कण-कण में कान्हा की लीलाओं का वास माना जाता है। यहाँ का श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर और
विश्राम
घाट आध्यात्मिक ऊर्जा के मुख्य केंद्र हैं। मथुरा की गलियाँ और यहाँ का वातावरण आज भी प्रेम और भक्ति के रस में डूबा हुआ
प्रतीत होता है।
3. माया (Haridwar):
हरिद्वार, जिसे प्राचीन काल में 'मायापुरी' कहा जाता था, वह स्थान है जहाँ गंगा नदी पर्वतों को छोड़कर पहली बार मैदानी
भाग
में प्रवेश करती है। इसे 'हरि का द्वार' भी कहा जाता है क्योंकि यह बद्रीनाथ और केदारनाथ जाने का मुख्य मार्ग है। 'हर की
पैड़ी' पर होने वाली भव्य गंगा आरती और यहाँ लगने वाला कुंभ मेला इसे विश्व का एक अद्वितीय आध्यात्मिक केंद्र बनाता है।
4. काशी (Varanasi):
विश्व के सबसे प्राचीन जीवित शहरों में से एक, काशी (वाराणसी) भगवान शिव की नगरी है। गंगा के तट पर स्थित यह नगरी
मोक्षदायिनी मानी जाती है; ऐसी मान्यता है कि यहाँ प्राण त्यागने से जीव जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है। बाबा
विश्वनाथ का मंदिर, यहाँ के 84 घाट और संध्या समय की आध्यात्मिक गूँज इसे ज्ञान और वैराग्य का सबसे बड़ा केंद्र बनाती
है।
5. कांचीपुरम (Kanchipuram):
दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित कांचीपुरम को 'मंदिरों का शहर' कहा जाता है। यह नगरी देवी कामाक्षी का निवास
स्थान
है और शैव व वैष्णव दोनों ही संप्रदायों के लिए अत्यंत पवित्र है। अपनी अद्भुत वास्तुकला और प्राचीन रेशम उद्योग के लिए
प्रसिद्ध यह शहर सदियों से शिक्षा और दर्शन का मुख्य केंद्र रहा है। इसे पूर्व की स्वर्ण नगरी के रूप में भी सम्मान
प्राप्त
है।
6. अवंतिका (Ujjain):
मध्य प्रदेश की क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित उज्जैन को प्राचीन काल में 'अवंतिका' के नाम से जाना जाता था। यहाँ भगवान
शिव
का दक्षिणमुखी महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थापित है। यह नगरी केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि काल गणना और ज्योतिष
विद्या के केंद्र के रूप में भी प्रसिद्ध रही है। हर बारह वर्ष में यहाँ 'सिंहस्थ कुंभ' का आयोजन होता है, जिसमें
करोड़ों
श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं।
7. द्वारावती (Dwarka):
गुजरात के पश्चिमी तट पर स्थित द्वारका भगवान श्री कृष्ण की कर्मभूमि और उनकी भव्य राजधानी है। गोमती नदी के संगम पर
स्थित
द्वारकाधीश मंदिर (जगत मंदिर) अपनी अद्वितीय ध्वजा और भव्यता के लिए विख्यात है। समुद्र के किनारे बसी यह नगरी भक्तों को
भगवान कृष्ण के ऐश्वर्यशाली और द्वारकाधीश स्वरूप का स्मरण कराती है, जिसे 'मोक्ष का द्वार' भी कहा जाता है।