मेरी यात्रा

भारत की ज्ञान की यात्रा

मेरी यात्रा - भारत की ज्ञान की यात्रा

१८ पुराण brahma puran
​1. ब्रह्म पुराण: ब्रह्म पुराण को आदि पुराण भी कहा जाता है और यह सभी पुराणों में सबसे पहला माना जाता है। यह मुख्य रूप से सृष्टि की उत्पत्ति, ब्रह्मा की महिमा, और विभिन्न तीर्थस्थलों, विशेषकर उड़ीसा में कोणार्क और पुरी के महत्व का वर्णन करता है। इसमें सौर मंडल के बारे में जानकारी और विभिन्न नैतिक उपदेश भी शामिल हैं, जो मानव जीवन के कर्तव्यों पर प्रकाश डालते हैं।
padma puran
​2. पद्म पुराण: पद्म पुराण अपने विशाल आकार के लिए जाना जाता है और इसमें सृष्टि की उत्पत्ति का वर्णन पद्म (कमल) से किया गया है, जिसमें से ब्रह्मा का जन्म हुआ था। यह पुराण मुख्य रूप से विष्णु की महिमा, विभिन्न व्रतों (उपवास), और गंगा नदी के महत्व को दर्शाता है। इसमें राम और सीता की कथा, साथ ही विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और नैतिकता के सिद्धांतों का विस्तृत विवरण मिलता है।
vishanu puran
​3. विष्णु पुराण: विष्णु पुराण एक महत्वपूर्ण वैष्णव पुराण है जो भगवान विष्णु को सर्वोच्च देवता के रूप में प्रतिष्ठित करता है। यह सृष्टि, प्रलय, विभिन्न मन्वन्तरों और राजवंशों के इतिहास पर प्रकाश डालता है। इसमें ध्रुव, प्रह्लाद, और भरत जैसे महान भक्तों की कथाएँ शामिल हैं, और यह मोक्ष प्राप्त करने के लिए भक्ति योग के मार्ग पर ज़ोर देता है।
shiv puran
​4. शिव पुराण: शिव पुराण भगवान शिव और उनके विभिन्न रूपों, लीलाओं, और उनके परिवार की महिमा को समर्पित है। यह शैव धर्म का एक प्रमुख ग्रंथ है, जिसमें शिव-पार्वती विवाह, शक्तिपीठों का महत्व, और शिव की पूजा-पद्धति का विस्तृत वर्णन किया गया है। यह शिव को सर्वोच्च सत्य के रूप में स्थापित करता है और भक्ति के माध्यम से मुक्ति प्राप्त करने का मार्ग बताता है।
shrimad bhagwat puran
​5. भागवत पुराण (श्रीमद्भागवतम्): भागवत पुराण, जिसे श्रीमद्भागवतम् भी कहा जाता है, भक्ति साहित्य में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह मुख्य रूप से भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों, विशेषकर भगवान कृष्ण की मनमोहक लीलाओं और उनके जीवन चरित्र का विस्तृत वर्णन करता है। इसमें मोक्ष प्राप्त करने के लिए प्रेम और भक्ति (भक्ति योग) के मार्ग पर बल दिया गया है और यह वैष्णव परंपरा के लिए आधारभूत ग्रंथ है।
narad puran
​6. नारद पुराण: नारद पुराण मुख्य रूप से देवर्षि नारद द्वारा सनकादि ऋषियों को दिए गए उपदेशों का संग्रह है। यह पुराण विभिन्न तीर्थस्थलों, व्रतों, और अनुष्ठानों के महत्व का वर्णन करता है। इसका एक बड़ा हिस्सा भविष्य खंड है, जिसमें विभिन्न धार्मिक ग्रंथों जैसे वेदों, उपनिषदों, और अन्य पुराणों की संक्षिप्त जानकारी और उनकी महत्ता का उल्लेख किया गया है, साथ ही संगीत और ज्योतिष पर भी कुछ जानकारी मिलती है।
markandey puran
​7. मार्कण्डेय पुराण: मार्कण्डेय पुराण अन्य पुराणों की तुलना में कम जटिल और अधिक कथा-प्रधान है। यह ऋषि मार्कण्डेय और उनके शिष्यों के बीच संवाद के रूप में संरचित है। इस पुराण का सबसे महत्वपूर्ण अंश 'देवी माहात्म्य' (दुर्गा सप्तशती) है, जो माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों और असुरों पर उनकी विजय की कथाओं का वर्णन करता है, और शाक्त परंपरा के लिए यह एक अत्यंत पवित्र ग्रंथ है।
agani puran
​8. अग्नि पुराण: अग्नि पुराण एक प्रकार का विश्वकोश (Encyclopedia) माना जाता है, क्योंकि इसमें लगभग हर विषय पर संक्षिप्त जानकारी मिलती है। यह मुख्य रूप से भगवान अग्नि द्वारा वसिष्ठ ऋषि को दिए गए उपदेशों का संग्रह है। इसमें पूजा-पाठ, ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, आयुर्वेद, राजनीति (राजधर्म), छंद शास्त्र और युद्ध कला जैसे विभिन्न विषयों का वर्णन शामिल है।
bhavishya puran
​9. भविष्य पुराण: भविष्य पुराण मुख्य रूप से भविष्य में होने वाली घटनाओं, जैसे कलियुग के राजाओं, वंशों, और विभिन्न युगों की परिस्थितियों का वर्णन करने के लिए जाना जाता है। इसमें सूर्य पूजा (सौर संप्रदाय) की महत्ता पर भी जोर दिया गया है। पुराण का एक बड़ा हिस्सा विभिन्न धार्मिक व्रतों, त्योहारों, और रीति-रिवाजों के महत्व को समर्पित है, जिससे यह सामाजिक और धार्मिक जीवन के लिए एक मार्गदर्शिका का काम करता है।
brahmvat puran
​10. ब्रह्मवैवर्त पुराण: ब्रह्मवैवर्त पुराण मुख्य रूप से भगवान कृष्ण को सर्वोच्च ब्रह्म के रूप में प्रतिष्ठित करता है। यह कृष्ण और राधा के दिव्य प्रेम, उनकी लीलाओं, और उनसे जुड़े विभिन्न देवी-देवताओं की उत्पत्ति का विस्तृत वर्णन करता है। इसमें प्रकृति (राधा) और पुरुष (कृष्ण) के संबंध पर विशेष बल दिया गया है और यह भक्ति और प्रेम के माध्यम से मोक्ष प्राप्त करने के मार्ग पर जोर देता है।
ling puran
​11. लिंग पुराण: लिंग पुराण भगवान शिव के निराकार स्वरूप 'लिंग' की पूजा और उसकी महत्ता पर केंद्रित है। इसमें शिव के विभिन्न अवतारों, उनकी लीलाओं, और शिव द्वारा लिंग रूप में प्रकट होने की कथाओं का वर्णन है। यह शैव धर्म के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसमें शिव की पूजा की विधि, विभिन्न तीर्थस्थलों, और सृष्टि के आरंभ और प्रलय के बारे में जानकारी मिलती है।
varah puran
​12. वराह पुराण: वराह पुराण भगवान विष्णु के वराह (जंगली सूअर) अवतार को समर्पित है, जिसमें उन्होंने पृथ्वी को जल से बाहर निकाला था। यह मुख्य रूप से भगवान विष्णु और पृथ्वी देवी के बीच संवाद के रूप में संरचित है। इसमें विभिन्न तीर्थस्थलों, व्रतों, विशेषकर मथुरा के महत्व का वर्णन है, और इसमें धार्मिक अनुष्ठानों और नैतिक कर्तव्यों के सिद्धांतों पर भी प्रकाश डाला गया है।
skand puran
​13. स्कन्द पुराण: स्कन्द पुराण सभी पुराणों में सबसे बड़ा और विशाल है, जो मुख्य रूप से भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय (स्कन्द) को समर्पित है। यह विभिन्न तीर्थस्थलों, पवित्र नदियों, और भारत के धार्मिक भौगोलिक स्थानों का विस्तृत वर्णन करता है। इसमें शिव-पार्वती से संबंधित कथाएँ, धार्मिक आचार-विचार, और नैतिक उपदेशों का एक विशाल संग्रह है, जो इसे तीर्थयात्रा और धर्म-ज्ञान के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत बनाता है।
vaman puran
​14. वामन पुराण: वामन पुराण मुख्य रूप से भगवान विष्णु के वामन (बौने) अवतार की कथा पर केंद्रित है, जिसमें उन्होंने राजा बलि से तीन पग भूमि माँगी थी। इस पुराण में विष्णु के चरित्रों, शैव और शाक्त कथाओं के साथ, सृष्टि की उत्पत्ति, स्वर्ग-नरक की अवधारणा, और विभिन्न तीर्थों जैसे कुरुक्षेत्र का विस्तृत वर्णन भी शामिल है।
kurma puran
​15. कूर्म पुराण: कूर्म पुराण भगवान विष्णु के कूर्म (कछुआ) अवतार को समर्पित है, जो समुद्र मंथन के दौरान आधार बने थे। यह मुख्य रूप से भगवान विष्णु द्वारा ऋषियों को दिए गए उपदेशों का संग्रह है। इसमें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के सिद्धांतों पर विस्तार से चर्चा की गई है, साथ ही विभिन्न धार्मिक व्रतों, तीर्थों, और चारों वर्णों के कर्तव्यों का भी वर्णन मिलता है।
matashya puran
​16. मत्स्य पुराण: मत्स्य पुराण भगवान विष्णु के मत्स्य (मछली) अवतार को समर्पित है, जिन्होंने मनु को प्रलय से बचाया था और वेदों की रक्षा की थी। यह मुख्य रूप से सृष्टि की उत्पत्ति, राजाओं के इतिहास, और विभिन्न देवताओं की वंशावली का वर्णन करता है। इसमें वास्तुकला, मूर्तिकला, और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और व्रतों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी शामिल है।
garud puran
​17. गरुड़ पुराण: गरुड़ पुराण विशेष रूप से मृत्यु, अंतिम संस्कार, और मरणोपरांत आत्मा की यात्रा से संबंधित है। यह पुराण भगवान विष्णु और उनके वाहन गरुड़ के बीच संवाद के रूप में संरचित है। इसमें कर्मों के फल, विभिन्न नरकों और स्वर्गों का वर्णन, तथा धार्मिक और नैतिक जीवन जीने के महत्व पर जोर दिया गया है। इसका 'पूर्वखंड' भाग विभिन्न विषयों पर उपदेश भी देता है, लेकिन 'प्रेतखंड' मृत्यु संबंधी अनुष्ठानों के लिए सबसे प्रसिद्ध है।
brahmand puran
​18. ब्रह्माण्ड पुराण: ब्रह्माण्ड पुराण मुख्य रूप से ब्रह्माण्ड (ब्रह्माण्ड) की उत्पत्ति, विभिन्न कल्पों (युगों) और मन्वन्तरों की संरचना पर केंद्रित है। यह पुराण वायु द्वारा नैमिषारण्य के ऋषियों को दिए गए ज्ञान पर आधारित है। इसका सबसे प्रसिद्ध हिस्सा 'अध्यात्म रामायण' है, जो राम कथा का एक आध्यात्मिक और भक्तिपूर्ण रूप है, और इसमें विभिन्न राजवंशों के इतिहास का भी वर्णन मिलता है।