मेरी यात्रा - भारत की ज्ञान की यात्रा
वन्यजीव एवं प्रकृति
सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान (पश्चिम बंगाल) :
पश्चिम बंगाल में गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना नदियों के डेल्टा क्षेत्र में स्थित सुंदरबन राष्ट्रीय
उद्यान विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव (सुंदरी वृक्षों का) जंगल है। यूनेस्को (UNESCO) के विश्व धरोहर
स्थल में शामिल यह उद्यान अपनी अनोखी जैव विविधता और प्रसिद्ध 'रॉयल बंगाल टाइगर' के प्राकृतिक आवास के
रूप में दुनिया भर में विख्यात है। यहाँ का बाघ तैरने की अपनी अनूठी कला के लिए जाना जाता है। नदी की
विभिन्न शाखाओं, दलदली द्वीपों, खारे पानी के मगरमच्छों, पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियों और घने सुंदरी
जंगलों से घिरा यह राष्ट्रीय उद्यान प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक अद्वितीय गंतव्य
है।
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (असम) :
असम के गोलाघाट और नगांव जिलों में ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे फैला काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान भारत के
सबसे समृद्ध और प्रसिद्ध वन्यजीव भंडारों में से एक है। यूनेस्को (UNESCO) के विश्व धरोहर स्थलों में
शामिल यह राष्ट्रीय उद्यान दुनिया भर में एक सींग वाले भारतीय गैंडों (One-horned Rhinoceros) की सबसे
बड़ी आबादी के प्राकृतिक आवास के रूप में विख्यात है। घने घास के मैदानों, दलदली झीलों और उष्णकटिबंधीय
जंगलों से घिरा यह पार्क गैंडों के अलावा रॉयल बंगाल टाइगर, एशियाई हाथी, जंगली जल भैंसे और दुर्लभ
पक्षियों की सैकड़ों प्रजातियों का घर है। काजीरंगा में की जाने वाली जीप और हाथी सफारी पर्यटकों को इन
अद्भुत वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक परिवेश में बेहद करीब से देखने का एक रोमांचक और अविस्मरणीय अनुभव
देती है।
नामदाफा राष्ट्रीय उद्यान (अरुणाचल प्रदेश)
अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले में भारत-म्यांमार सीमा के निकट स्थित नामदाफा राष्ट्रीय उद्यान
पूर्वोत्तर भारत का सबसे विशाल और जैव विविधता से समृद्ध संरक्षित क्षेत्र है। पूर्वी हिमालय के जैव
विविधता हॉटस्पॉट में फैला यह उद्यान दुनिया का एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ बिल्ली प्रजाति (Big
Cats) के चार प्रमुख सदस्य—रॉयल बंगाल टाइगर, भारतीय तेंदुआ, हिम तेंदुआ (Snow Leopard) और क्लाउडेड
लेपर्ड (धूमिल तेंदुआ) एक साथ पाए जाते हैं। घने सदाबहार वर्षावनों, विशाल नदियों और बर्फीली पर्वत
चोटियों से घिरा यह पार्क दुर्लभ लाल पांडा, भारत के एकमात्र वानर 'हूलॉक गिब्बन' और गंभीर रूप से
लुप्तप्राय 'नामदाफा उड़ने वाली गिलहरी' का प्राकृतिक घर है। अपनी दुर्गम भौगोलिक बनावट, अद्वितीय
वनस्पति और समृद्ध वन्यजीव संपदा के कारण नामदाफा राष्ट्रीय उद्यान प्रकृति प्रेमियों, शोधकर्ताओं
और ट्रेकर्स के लिए एक रोमांचक गंतव्य है।
खोनोमा ग्रीन विलेज (नागालैंड)
नागालैंड की राजधानी कोहिमा से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित खोनोमा गाँव भारत का पहला आधिकारिक
'हरित गाँव' (Green Village) होने का गौरव रखता है। अंगामी नागा जनजाति का यह ऐतिहासिक गाँव अपनी
अटूट पर्यावरण संरक्षण परंपरा, सीढ़ीदार खेतों (Terraced Farming) और घने जंगलों के लिए दुनिया भर
में प्रसिद्ध है। कभी शिकार के लिए जाने जाने वाले यहाँ के ग्रामीणों ने 1990 के दशक में वन्यजीवों
की रक्षा के लिए शिकार और पेड़ों की कटाई पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाकर 'खोनोमा नेचर कंजर्वेशन एंड
ट्राइगोपन सेंचुरी' की स्थापना की। यहाँ की अनूठी नागा वास्तुकला, पत्थर के प्राचीन प्रवेश द्वार
(खरु), पारंपरिक नक्काशीदार घर और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत इसे पर्यावरण-पर्यटन (Eco-Tourism) का
एक वैश्विक मॉडल बनाते हैं। शांति, स्वच्छता और जनजातीय इतिहास के संगम का अनुभव करने के लिए यह
गाँव यात्रियों और शोधकर्ताओं के लिए एक बेहतरीन गंतव्य है।
युमथांग वैली (सिक्किम) :
उत्तरी सिक्किम में समुद्र तल से लगभग 11,800 फीट की ऊँचाई पर स्थित युमथांग घाटी को लोकप्रिय रूप
से 'सिक्किम की फूलों की घाटी' (Valley of Flowers) कहा जाता है। तीस्ता नदी की सहायक धारा लाचुंग
नदी के किनारे फैली यह मनोरम अल्पाइन घाटी बसंत के मौसम (फरवरी से जून) में रोडोडेंड्रॉन (बुरांश),
प्रिम्युला, खसखस और दुर्लभ जंगली फूलों की दर्जनों प्रजातियों से पूरी तरह ढक जाती है। बर्फ़ से
ढकी हिमालय की विशाल चोटियों, हरे-भरे चीड़ और देवदार के वनों तथा प्राकृतिक गर्म पानी के झरनों
(Hot Springs) से घिरी यह घाटी पर्यटकों को एक जादुई परिदृश्य का अनुभव कराती है। सर्दियों में सफेद
बर्फ की चादर ओढ़ने वाला यह इलाका लाचुंग शहर से आसानी से पहुंचा जा सकता है और प्रकृति प्रेमियों,
फोटोग्राफरों व शांति की तलाश करने वाले यात्रियों के लिए सिक्किम का एक प्रमुख आकर्षण है।
सिपाहीजाला वन्यजीव अभयारण्य (त्रिपुरा)
त्रिपुरा के सिपाहीजाला जिले में अगरतला से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सिपाहीजाला वन्यजीव
अभयारण्य राज्य का एक प्रमुख जैव विविधता और पर्यावरण-पर्यटन केंद्र है। लगभग 18 वर्ग किलोमीटर के
क्षेत्र में फैला यह अभयारण्य घने पर्णपाती जंगलों, प्राकृतिक झीलों और औषधीय पौधों के बगीचों से
सुसज्जित है। इस संरक्षित क्षेत्र की सबसे प्रमुख पहचान त्रिपुरा का राज्य पशु 'स्पेक्टेकल्ड लंगूर'
(Phayre's leaf monkey) है, जिसकी सुरक्षा और संरक्षण के लिए यह अभयारण्य विशेष रूप से जाना जाता
है। इसके अलावा यहाँ क्लाउडेड लेपर्ड (धूमिल तेंदुआ), भौंकने वाले हिरण, सिवेट और देशी-विदेशी
प्रवासी पक्षियों की कई प्रजातियाँ पाई जाती हैं। परिसर के भीतर स्थित एक प्राणी उद्यान (Zoo),
बोटिंग की सुविधा वाली झील, रबर व कॉफी बागान और खिलौना ट्रेन (Toy Train) इसे प्रकृति प्रेमियों,
शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए एक आकर्षक स्थल बनाते हैं।
ज़ाकिर हुसैन रोज़ गार्डन (चंडीगढ़) :
चंडीगढ़ के सेक्टर 16 में लगभग 30 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला ज़ाकिर हुसैन रोज़ गार्डन एशिया
का सबसे बड़ा गुलाब का बगीचा माना जाता है। भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ज़ाकिर हुसैन के नाम पर
स्थापित और चंडीगढ़ के तत्कालीन मुख्य आयुक्त एम. एस. रंधावा की देखरेख में 1967 में तैयार किया गया
यह वनस्पति उद्यान अपनी अद्भुत सुंदरता और योजनाबद्ध लैंडस्केपिंग के लिए प्रसिद्ध है। इस उद्यान
में गुलाब की 1,600 से अधिक दुर्लभ और संकर (Hybrid) किस्में तथा लगभग 50,000 से ज्यादा पौधे मौजूद
हैं। गुलाबों के अलावा, यहाँ विभिन्न प्रकार के औषधीय वृक्ष और जड़ी-बूटियाँ भी संरक्षित हैं। हर
साल फरवरी या मार्च के महीने में यहाँ आयोजित होने वाला तीन दिवसीय 'रोज़ फेस्टिवल' (Rose Festival)
देश-विदेश के पर्यटकों, प्रकृति प्रेमियों और बागवानी के शौकीनों को बड़े पैमाने पर आकर्षित करता
है।
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